मित्रता की नयी कहानी: जब एक लोमड़ी ने एक भालू को अपना दोस्त बनाया

बहुत समय पहले की बात है, एक जंगल में एक भालू रहता था। भालू बहुत अकेला था क्योंकि उसके साथ कोई दूसरा जानवर नहीं था। भालू का दिन और रात केवल भोजन के लिए ही कटता था। वह जब भी उठता तो अपने भोजन की तलाश में अकेला इधर-उधर भटकता रहता।

एक दिन, भालू ने एक लोमड़ी को देखा, जो उसके पास आई और बोली, “नमस्कार भाई भालू! क्या तुम मेरे साथ खेलना चाहोगे?”

भालू आश्चर्यचकित था, क्योंकि उसने पहले कभी किसी अन्य जानवर से दोस्ती नहीं की थी। लेकिन उन्होंने यह भी सोचा कि यह अपने अकेलेपन को पीछे छोड़कर किसी के साथ समय बिताने का एक अवसर है। तो भालू ने लोमड़ी से कहा, “हाँ, मैं खेलने के लिए तैयार हूँ।”

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भालू और लोमड़ी मिलकर खूब मौज-मस्ती करने लगे। वे एक दूसरे के साथ दौड़ते, खेलते और हँसते थे। दिन-रात बिताते हुए उन्हें कभी अकेलापन महसूस नहीं हुआ। भालू लोमड़ी को अपना सबसे अच्छा दोस्त मानने लगा।

एक दिन, जब भालू और लोमड़ी दौड़ रहे थे और खेल रहे थे, तो भालू एक गहरे गड्ढे में फंस गया। वह बेहोश हो गया और बाहर नहीं निकल सका। लोमड़ी बेचैन हो गई और उसे बचाने की कोशिश करने लगी। उसने धैर्यपूर्वक सोचा और फिर लकड़ी के लट्ठे में रस्सी बाँधकर भालू को बचाने की कोशिश की।

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लोमड़ी सफल रही और भालू बेहोशी से बाहर आ गया। जब उसे होश आया तो उसने देखा कि उसके अच्छे दोस्त लोमड़ी ने उसे बचा लिया है। भालू ने लोमड़ी को धन्यवाद दिया और दोनों के बीच का बंधन और मजबूत हो गया।

उस दिन के बाद से भालू और लोमड़ी हमेशा साथ-साथ रहने लगे। वे साथ-साथ खेलते और मौज-मस्ती करते थे। अन्य जानवर भी उन्हें आश्चर्य से देखने लगे क्योंकि वे वास्तव में अच्छे दोस्त बन गए थे।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि दोस्ती

ये कोई ऐसी चीज़ नहीं है, जो सिर्फ इंसान के लिए हो. दोस्ती हमेशा हमारे चारों ओर होती है, हमें बस इसे महसूस करना है और स्वीकार करना है।

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